बिकाऊ मीडिया
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लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया से भारतीय लोकतंत्र पर गंभीर संकट पैदा हो गए हैं। 2 तीन अखबार और एक दो चैनलों को छोड़ कर अन्य सैकड़ों चैनलों और हजारों समाचार पत्रों ने झूठ और नफरत का झंडा पूरी तरह से थाम लिया है। भारत के समाचार चैनलों और अखबारों ने पिछले तीन वर्षों में सत्ता पक्ष की चापलूसी और चाकरी का ऐसा रवैया अपनाया है कि हर इंसान, जिस में थोड़ी भी शर्म है, वह पूरी तरह से हैरान है। इन मीडिया वालों की दोहरी भूमिका ने इतिहास रच दिया है।
*अरनब गोस्वामी, अंजना ओम कश्यप, रोहित सरदाना, अमीश देवगन, प्रषुण जोशी, सुरेश चवान, सुधीर चौधरी, स्वेता सिंह, रुबिका लियाकत, रुमाना सहर और इनके अलावा कई और ज़मीर फरोश पत्रकारों के वो नाम हैं, जिनके सामने झूठ और जिल्लत भी शर्मिंदा है। खासतौर से बेशर्म अर्नब गोस्वामी और भेदभावी स्वभाव वाले रोहित सरदाना की छवि तो और भी घिनोनी है।*
यह वही मीडिया है जिसने पिछले चार वर्षों से देश के लोगों की मानसिकता को चरमपंथ और फासीवाद की ओर मोड़ने का काम किया है। इन अपराधियों ने आम आदमी के दिमाग के सोच की गिरावट खतरों की ओर धकेलने के लिए एक मिशन चलाया है। मोदी सरकार की असफलताओं को छुपाने का काम इन लोगों ने किया है। विफल और नाकाम सत्ता धारियों से पूछताछ करने के बजाय, इन लोगों ने चालाकी से सच और सही लिखने वाले लेखकों को कटघरे में खड़ा किया था। इन्हीं लोगों की नफरत भरी पत्रकारिता ने कई धर्मनिरपेक्ष, न्याय और मानवता के साथ खड़े लेखकों और बेबाक बोलने वालों को मार दिया है। और उनके हत्यारे इन्हीं के झूठे प्रोपेगैंडा और दुष्प्रचार में शरण लिए हुए हैं।
*झूठ, झूठ और सिर्फ झूठ, नफरत, नफरत और केवल नफरत में इन्होंने अपरिचित अपराधियों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और केवल आपराधिक गतिविधियों में वे ऐसी घृणा बन गए हैं कि दुनिया में सच्चाई के दूतों, संतों, महाजनों और प्रोफेसरों के अस्तित्व को समाप्त किया जा रहा है, हिंदुओं मुस्लिमों का नाम नफरत के तौर पर देश भर में फैल रहा है, आग और खून का प्रवाह फैल गया है, ये लोग अब असहनीय हैं*
आज वही मीडिया सबसे विकृत और अपमानजनक मानवता दे रहा है, और सम्मानित मीडिया रिपोर्टर रवीश कुमार ने कहा कि भारतीय टीवी चैनलों को चुनाव पूरा होने तक बंद कर दिया जाना चाहिए, और निश्चित रूप से इस में कोई गलत नहीं है।
लिहाज़ा समय आ गया है कि
इस मीडिया के विरुद्ध खड़ा हुआ जाए। इसके लिए जमीनी आंदोलन भी आवश्यक है और सोशल मीडिया पर इनके खिलाफ आवाज उठाकर और इनकी व्यापक वास्तविकता को उजागर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आपके लिए प्रभावी और उपयुक्त है, जहां अपराधी लोगों को आप सीधे अपने गुस्से से अवगत करा सकते हैं। हम दुनिया को सूचित कर सकते हैं कि हमारे देश के बारे में यह मीडिया जो भी खबरें बताता हैं उन पर विश्वास नहीं करना है, इसलिए टीवी चैनलों के बातों और बिकाऊ अख़बारों पे ज़्यादह ध्यान न दें।
ये हमारी राय है।
मोहम्मद लुक़मान

In zameer faroshon se Allah Mulk aur ahle mulk ko bachae
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया
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ReplyDeleteبہت اچھا
शुक्रिया
Deleteأج کلکے میڈیا والے بھی بکاٶ ہوگےَ ہیں
ReplyDeleteمیڈیا ہی ملک کا روح ہے
ReplyDeleteمیڈیا ہی ملک کا روح ہے
ReplyDeleteBahut acha hai yeah sahab bilkul sach hi
ReplyDeleteصحیح بات ہے
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