एक शौहर ने अपनी पत्नी को नसीहत किया
﷽
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बर कातुह
एक साहब ने अपनी बीवी से ये नसीहत कि के चार बातों का हर वक्त ध्यान रखना:
पहली बात ये के मुझे तुम से बहुत ज़्यादा मुहब्बत है।
इसलिए मैंने तुमको बीवी के रूप मे पसंद किया। अगर तुम मुझे अच्छी न लगती तो मैं निकाह़ कर के तुमको घर ही न लाता।
आप को बीवी बनाकर इस बात का सुबूत है के मुझे आप से मुहब्बत है
इसलिए मैं इंसान हूँ फरिश्ता नहीं हूँ अगर किसी समय मैं ग़लती कर लूं छुपा लेना। छोटी मोटी ग़लतियों (कोताहीयों ) के तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए।
और दूसरी बात ये के मुझे ढोल की तरह न बजाना बीवी ने कहा, क्या मत़लब ?
उसने कहा मान लो अगर मैं गुस्से मे हूँ तो मेरे सामने उस समय जवाब न देना ।
मर्द गुस्से में हो जब कुछ कह रहा हो और आगे से औरत की ज़ुबान चल रही हो तो यह चीज बहुत ख़तरनाक है।अगर मर्द गुस्से में है। तो औरत ठंडा पड जाए और अगर औरत गुस्से मे है तो शौहर को चाहिए के उसको मनाले ।
दोनों तरफ से एक ही समय मे गुस्सा आजाना यूं है कि रस्सी को दोनों तरफ से खींचने वाली बात है। एक ओर से रस्सी को खीचें और दूसरी तरफ से ढीला छोड़ दें तो वह नहीं टूटती अगर दोनों तरफ से खूब ज़ोर से खीचें तो खिच पडने से वह रस्सी टूट जाती है।
तीसरी नसीहत ये है कि देखना मुझसे राज़ की हर बातें करना मगर लोगों के शिकवा शिकायत चुगली वाली बातें नहीं करना।
चूंकि अक्सर समय में औरत और मर्द आपस मे तो बहुत अच्छा समय गुज़ारा लेते हैं। मगर ननद की बातें सास की बातें, औरों की बातें , यह जिनदगी के अंदर ज़हर घोल देती हैं । इस लिए शिकवे शिकायत से दूर ही रहना और बचते रहना ।
और चौथी बात ये कि देखना दिल एक है या तो उसमें मुहब्बत हो सकती है यातो नफ़रत ।एक समय में दो चीज़ें नहीं रह सकतीं।
अगर तुम्हारे दिल के खिलाफ मेरी कोई बात बुरी लगे तो दिल में न रखना, मुझसे खुलकर बातें करना, बातें दिल मे रखने से मनुष्य शैतानी खियालों का शिकार होजाता है दिल में नफ़रतें बढऩे लगती हैं और आपसी लगाव खत्म हो जाते हैं और ज़िन्दगी दिशा बदल देते हैं।
मोहम्मद लुक़मान
( शिक्षक)
जामिया इसलामिया क़ुरआनीया सेमरा पच्छिमी चम्पारण
एक साहब ने अपनी बीवी से ये नसीहत कि के चार बातों का हर वक्त ध्यान रखना:
पहली बात ये के मुझे तुम से बहुत ज़्यादा मुहब्बत है।
इसलिए मैंने तुमको बीवी के रूप मे पसंद किया। अगर तुम मुझे अच्छी न लगती तो मैं निकाह़ कर के तुमको घर ही न लाता।
आप को बीवी बनाकर इस बात का सुबूत है के मुझे आप से मुहब्बत है
इसलिए मैं इंसान हूँ फरिश्ता नहीं हूँ अगर किसी समय मैं ग़लती कर लूं छुपा लेना। छोटी मोटी ग़लतियों (कोताहीयों ) के तरफ ध्यान नहीं देना चाहिए।
और दूसरी बात ये के मुझे ढोल की तरह न बजाना बीवी ने कहा, क्या मत़लब ?
उसने कहा मान लो अगर मैं गुस्से मे हूँ तो मेरे सामने उस समय जवाब न देना ।
मर्द गुस्से में हो जब कुछ कह रहा हो और आगे से औरत की ज़ुबान चल रही हो तो यह चीज बहुत ख़तरनाक है।अगर मर्द गुस्से में है। तो औरत ठंडा पड जाए और अगर औरत गुस्से मे है तो शौहर को चाहिए के उसको मनाले ।
दोनों तरफ से एक ही समय मे गुस्सा आजाना यूं है कि रस्सी को दोनों तरफ से खींचने वाली बात है। एक ओर से रस्सी को खीचें और दूसरी तरफ से ढीला छोड़ दें तो वह नहीं टूटती अगर दोनों तरफ से खूब ज़ोर से खीचें तो खिच पडने से वह रस्सी टूट जाती है।
तीसरी नसीहत ये है कि देखना मुझसे राज़ की हर बातें करना मगर लोगों के शिकवा शिकायत चुगली वाली बातें नहीं करना।
चूंकि अक्सर समय में औरत और मर्द आपस मे तो बहुत अच्छा समय गुज़ारा लेते हैं। मगर ननद की बातें सास की बातें, औरों की बातें , यह जिनदगी के अंदर ज़हर घोल देती हैं । इस लिए शिकवे शिकायत से दूर ही रहना और बचते रहना ।
और चौथी बात ये कि देखना दिल एक है या तो उसमें मुहब्बत हो सकती है यातो नफ़रत ।एक समय में दो चीज़ें नहीं रह सकतीं।
अगर तुम्हारे दिल के खिलाफ मेरी कोई बात बुरी लगे तो दिल में न रखना, मुझसे खुलकर बातें करना, बातें दिल मे रखने से मनुष्य शैतानी खियालों का शिकार होजाता है दिल में नफ़रतें बढऩे लगती हैं और आपसी लगाव खत्म हो जाते हैं और ज़िन्दगी दिशा बदल देते हैं।
मोहम्मद लुक़मान
( शिक्षक)
जामिया इसलामिया क़ुरआनीया सेमरा पच्छिमी चम्पारण

بہت اچھا
ReplyDeleteبہت اچھا
ReplyDeleteبہت اچھا مضمون ہے
ReplyDeleteMasha Allah
ReplyDeleteBahut Khoob Bahut umdah Bahut Naafe
Masha allah
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