( कब्र मनुष्य को कहती है )
﷽
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहे व बरकातुह
मुहतरम हज़रात
कब्र मनुष्य को कहती है के
ऐ आदम की औलाद मैने तेरा हर दिन ईन्तेजार किया , क्या तुने मुझे याद किया ?? जरा सुन !
मेरे अंदर अंधेरा है , नमाज की रोशनी लेते आना !
मेरे अंदर गभराहट है , तिलावते कुरआन लेते आना !
मेरे अंदर साँप और बिच्छु है , नबी सलल्लाहु अलैही वसल्लम की सुन्नत लेते आना !
मेरे अंदर आग है , खौफे खुदा का पानी लेते आना !
!!! याद रख !!!
आज अमल है , हिसाब नही !
कल हिसाब होगा , अमल नही
अल्लाह पाक हमें अजाबे कबर से बचाए....आमीन ! कयामत के दिन सवाल ये भी पुछा जायेग जवानी कैसे गुजारा
माल कैसे कमाया
हलाल या हराम।
5जगह हसना बडे गुनाहों के बराबर है
1.कब्रस्तान में
2.जनाजे के पीछे
3.मजलिस में
4.तिलावत -ऐ- कुरान में
5.मस्जिद मे
अकेले हो?
अल्लाह को याद करो
परेशान हो?
दरुदे पाक पढ़ो
उदास हो?
या हयु या कयुम पढो.
टेन्शन मे हो?
या रहीम पढो.
या अल्लाह हम पर और तमाम उम्मत पर रहम फरमा
आमीन.
नोट
क्या आप जानते है.
क़ुरआन पाक को सुनने से कैंसर नही होता है बल्कि कैंसर अगर हो तो वो भी मर जाता है।
लम्बे सज़दे करने से ज़ेहन तेज होता है,सर सर्द ओर बाल गिरने से बचता हैं,
तशह्हुद के दौरान शहादत की उंगली उठाने से दिल मजबूत होता है
( फौलो )
क़ुरआन और सुन्नत
.
''कैन्सर"
एक खतरनाक बिमारी है...
बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं ...
बहुत मामुली एहतियात कर के इस बिमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है ...
अक्सर लोग खाना खाने के बाद "पानी" पी लेते है ...
खाना खाने के बाद "पानी"खून मे मौजूद "कैन्सर "का सबाब बनने वाले '''केल्श'''को '''आक्सीजन''' फरहम करता है...
खाने से पहले 'पानी' पीना '''' शिफ़ा"है.
खाना खत्म होने से पहले 'पानी' ''पीना दवा'' है...
खाने के बाद 'पानी' पीना "वबा" (बिमारी) हैं...
बेहतर है खाना खत्म होने के कुछ देर बाद 'पानी' पीये...
शिफ़ा ही शिफ़ा
रोज़ एक सेब
नो डॉक्टर
रोज पाँच बदाम,
नो कैन्सर
रोज एक नींबू,
नो पेट बढ़ना
रोज एक गिलास दूध,
नो बौना (कद का छोटा)
रोज 12 गिलास पानी,
नो चेहरे की समस्या
रोज चार ख़ज़ूर,
नो भूख.
रोज पाँच वक्त की नमाज़,
नो टेन्शन
रोज तिलावते क़ुरआन
सुकून ही सुकून
"चेहरे के लिए वज़ू का पानी"
"जिगर के लिए क़ुरआन की तिलावत"
सेहत के लिए नमाज़"
और खुश रहने के लिए अल्लाह का जिक्र किया करो।
मोहम्मद लुक़मान
Jamia Islamia Qurania Semra West Champaran Bihar
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहे व बरकातुह
मुहतरम हज़रात
कब्र मनुष्य को कहती है के
ऐ आदम की औलाद मैने तेरा हर दिन ईन्तेजार किया , क्या तुने मुझे याद किया ?? जरा सुन !
मेरे अंदर अंधेरा है , नमाज की रोशनी लेते आना !
मेरे अंदर गभराहट है , तिलावते कुरआन लेते आना !
मेरे अंदर साँप और बिच्छु है , नबी सलल्लाहु अलैही वसल्लम की सुन्नत लेते आना !
मेरे अंदर आग है , खौफे खुदा का पानी लेते आना !
!!! याद रख !!!
आज अमल है , हिसाब नही !
कल हिसाब होगा , अमल नही
अल्लाह पाक हमें अजाबे कबर से बचाए....आमीन ! कयामत के दिन सवाल ये भी पुछा जायेग जवानी कैसे गुजारा
माल कैसे कमाया
हलाल या हराम।
5जगह हसना बडे गुनाहों के बराबर है
1.कब्रस्तान में
2.जनाजे के पीछे
3.मजलिस में
4.तिलावत -ऐ- कुरान में
5.मस्जिद मे
अकेले हो?
अल्लाह को याद करो
परेशान हो?
दरुदे पाक पढ़ो
उदास हो?
या हयु या कयुम पढो.
टेन्शन मे हो?
या रहीम पढो.
या अल्लाह हम पर और तमाम उम्मत पर रहम फरमा
आमीन.
नोट
क्या आप जानते है.
क़ुरआन पाक को सुनने से कैंसर नही होता है बल्कि कैंसर अगर हो तो वो भी मर जाता है।
लम्बे सज़दे करने से ज़ेहन तेज होता है,सर सर्द ओर बाल गिरने से बचता हैं,
तशह्हुद के दौरान शहादत की उंगली उठाने से दिल मजबूत होता है
( फौलो )
क़ुरआन और सुन्नत
.
''कैन्सर"
एक खतरनाक बिमारी है...
बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं ...
बहुत मामुली एहतियात कर के इस बिमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है ...
अक्सर लोग खाना खाने के बाद "पानी" पी लेते है ...
खाना खाने के बाद "पानी"खून मे मौजूद "कैन्सर "का सबाब बनने वाले '''केल्श'''को '''आक्सीजन''' फरहम करता है...
खाने से पहले 'पानी' पीना '''' शिफ़ा"है.
खाना खत्म होने से पहले 'पानी' ''पीना दवा'' है...
खाने के बाद 'पानी' पीना "वबा" (बिमारी) हैं...
बेहतर है खाना खत्म होने के कुछ देर बाद 'पानी' पीये...
शिफ़ा ही शिफ़ा
रोज़ एक सेब
नो डॉक्टर
रोज पाँच बदाम,
नो कैन्सर
रोज एक नींबू,
नो पेट बढ़ना
रोज एक गिलास दूध,
नो बौना (कद का छोटा)
रोज 12 गिलास पानी,
नो चेहरे की समस्या
रोज चार ख़ज़ूर,
नो भूख.
रोज पाँच वक्त की नमाज़,
नो टेन्शन
रोज तिलावते क़ुरआन
सुकून ही सुकून
"चेहरे के लिए वज़ू का पानी"
"जिगर के लिए क़ुरआन की तिलावत"
सेहत के लिए नमाज़"
और खुश रहने के लिए अल्लाह का जिक्र किया करो।
मोहम्मद लुक़मान
Jamia Islamia Qurania Semra West Champaran Bihar

بہت اچھا
ReplyDeleteاللہ تعالی محفوظ فرمائے
ReplyDeleteBahot badhiya
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