ह़ज का बुनियादी मक़सद तक़वा है
﷽
पूरे आलम से बहुत से मुसलमान हजे बैतुल्लाह के लिए रवाना हो रहे हैं, यानी इस फरीजा की अदायगी के लिए जिसको इस्लाम का बुनियादी सतून कहा गया है, जो महज जिस्मानी इबादत नहीं बल्कि रूहानी इबादत भी है और माली इबादत भी। हज के दिनों में बंदा अल्लाह के बहुत करीब होता है, वह अपने घर को, अपने बच्चों को और अपने अहबाब को, अर्थात हर चीज को छोड़कर बिना सिले हुए कपड़ों में अल्लाह के पाक घर में हाजिर होता है और उसकी खुशनूदी चाहता है। हज के दौरान जो अरकान अदा किए जाते हैं उन पर अल्लाह की जानिब से बड़ा अजर अता किया जाता है। जो लोग हज अदा करने के लिए जाते हैं, उनके लिए जरूरी होता है कि वह तकवा एख्तियार करें, क्योंकि तकवा अल्लाह को बेहद पसंद है और अल्लाह की नजदीकी का जरिया है और क्योंकि हज में बंदा अल्लाह की रजा का तालिब होता है, इसलिए उसके लिए ऐसे कार्य करने जरूरी होते हैं, जिनके जरिए वह अल्लाह की नजदीकी प्राप्त करे। इसीलिए हज के दौरान हाजियों की जो तरबीयत होती है, वह तकवा पर मबनी होती है। हज के दौरान न शहवानी बातों की इजाज़त होती है, न लड़ाई झगड़े की और न ही नस्ब व जात पर फख्र करने की।
मोहम्मद लुक़मान
शिक्षक
जामिया इसलामिया क़ुरआनिया सेमरा पछ्मी चम्पारण
मोबाइल नंबर 9708990692

ماشاءاللہ
ReplyDeleteاللّٰہ آپ کو خوب خوب ترقیات سے نوازے
bahut achha
ReplyDeleteماشاللہ بہت خوب
ReplyDeleteاللہ تعالی حج کے ساتھ تقوی بھی نصیب فرماے
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