ओलमा की क़दर अवाम की नज़र में






रात के लगभग 2 या 3 बज रहे होंगे नींद नहीं आरही थी।
वजह यह थी के
एहसास ये हो रथा के आलिमों की क्या शान थी
लेकिन आज कोई भी आलिम जिसके पास दौलत हो,क्या वह आलिम बन कर ( कहीं इमामत या दीन के कार्य)पसंद करता है ??


९०% लोग यही जवाब देंगे नहीं, लेकिन ऐसा क्यों?


आलिम की ज़िंदगी पर थोड़ा नज़र दौड़ाइए

जब हिफ्ज़ करने का ज़माना होता है तब फज्र से ज़ुहर तक और अस्र के बाद मग़रिब के बाद इशा के देर रात तक बस इतना ही नहीं बल्कि फज्र से पहले भी इस तरह पढ़ाई करनी होती है के सर ऊचा न होजाए,

जब अरबी पड़ने का वक़्त आता है तो ७ या ८ किताबें पहली कलास थमा दी जाती हैं
और जैसे जैसे आगे बढ़ना होता है किताबें भी बढ़ती रहती हैं यहां तक हदीस की बहुत सारी किताबें  पड़ जाते हैं

और पड़ाई के ज़माने मे खाने का क्या कहना माशाअल्लाह दुनिया की एक क़ौम है जो खाने मे इतनासब्र करती है

उसके बाद क्या होता है बच्चा कम से कम १३ साल पढ़ने के बाद अब वह सोचता है मेरी माँ बीमार बाप बूढ़े हो गए हैं बहनों की शादी भी करनी है और भी कई ज़िम्मेदारीयां हैं
कुछ करता हूँ।
मगर करूं क्या?
मैं हाफिज़ भी हूँ ,आलिम भी हूँ, फाज़िल भी हूँ मगर करूँ क्या??
सोचता है इमामत करूँ , लेकिन तनख्वाह ८००० है या९०००है लेकिन सब्र का आखिरी सीमा देखीए कहता है माशाअल्लाह,
उसके बाद क्या होता है, अरे इमाम साहब बाहर क्यों गए मस्जिद से ?
इमाम साहब सुन्नत नहीं पड़ते
इमाम साहब नमाज़ मे बहुत लम्बी सूरह पड़ते हैं

इमाम साहब हर समय घर जाने के फिराक मे रहते हैं?
ऐसे बहुत सारे मसाएल क्यों????क्योंकि आपको ८००० आढ़ हज़ार जो दे रहे हैं।

मेरे भाईयों शर्म करो शर्म।
 ये क़ौम इतना ज़लील हो गई????? बताओ मुझे।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया ओलमा नबी के वारिस हैं

अल्लाह न करे अगर ऐसा ही चाल और नेचर रहा वह दिन दूर नहीं एक भी आलिम और हाफिज़ नहीं मिलेंगे
हमारा  मुस्लिम नाम रखने वाला भी नहीं मिलेगा ।
इस लिए आप ह़ज़रात से मेरी बिनती है कि ओलमा की क़दर करें


मोहम्मद लुक़मान (शिक्षक)

जामिया इसलामिया कुरआनीया सेमरा

Comments

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    1. ماشاءاللہ بہت خوب
      اللّٰہ ہمیں اپنے علماء کرام کا قدرداں بنائے

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  2. اللہ تعالی علماء کی قدر کرنے کی توفیق عطا فرمائے

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