झूठी क़समें

                               ﷽
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बर कातुह।
मुहतरम हज़रात ।
     कभी कभी हम और आप कसमें खा खा कर ये बताने की       की कोशिश करते हैं कि जो कुछ कह रहे हैं वह सच है। अक्सर लोग ऐसे मौका पर अल्लाह कसम। कुरआन कसम,इमाम से कहा करते हैं ये बात ठीक नहीं । ऐसी कसमें खानी बुरी बात है
        अगर आप सच कह रहे हैं तो कसम की क्या ज़रूरत?
अगर झूठ बोल रहे हैं तो कसम खाकर आप सुनने वालों को धोखा दे रहे हैं। और अल्लाह के नाम की बेअदबी कर रहे हैं, अगर कोई आप पर कसम के लिए ज़ोर दे और बात सच्ची हो ,तो कसम खा सकते हैं। वर न बेला वजह हरगिज़ कसम न खाएं झूठी कसम खाना बहुत बडा गुनाह है।
मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व  वसल्लम ने फरमाया :-
       झूठी कसम खाना ऐसा बडा गुनाह है जैसा शिरक करना।

ये भी याद रखें अल्लाह के सेवा किसी और का कसम खाना। जैसे ये कहना कुरआन की कसम, बाप की कसम, तुम्हारे सर की कसम, मक्का की कसम, ईमान की कसम ये सब कसमें नाजायज़ हैं।
अगर कसम खानी हो तो सिर्फ अल्लाह की कसम खाओ ।
     झूठे आदमी के चेहरे से पता चल जाता है के ये बुरा आदमी है लोग उसकी नहीं करते, उके बाप का कोई एतबार नहीं होता,  लोग उसको ज़लील समझते हैं।


अल्लाह पाक तमाम लोगों को झूठी कसम खाने से बचाए
            ( आमीन )
दुआओं का मुहताज
मोहम्मद लुक़मान
जामिया इसलामीया कुरआनिया सेमरा  पच्छिमी चम्पारण

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