सच और झूठ


मुहतरम हज़रात
       अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातुह
         जो बात जिस तरह हो उसको वैसे ही बयान करना चाहिए।अपनी तरफ से उसमे कमी बेशी न करना सच कहलाता है और घटा बढाकर बयान करना या जो न हुआ हो । उसको बताना के होगया । जो होगया उसको कहना के नही हुआ। ये झूठ कहलाता है।
जैसे के सुबह को उठने मे देर हो गई औफिस देर से आए ,
जब औफिस का मालिक या मैनेजर ने पूछा  देर कैसे हूई क्यों हूई। अब अगर आप असली बात बता देते हैं तो ये सच है।
और अगर आप ने कह दिया गाडी ,छूट गई ट्रेन लेटे हो गई या कोई और बात बना दी ये झूठ है,

इसलाम का हुक्म ये है कि जो बात जिस प्रकार हो । उसको ऐसी ही बयान करो । उसमे कमी बेशी मत करो।

         इसलाम ने सच को हर समय पर हर मौके पर लाजिम किया है और झूठ को हराम बताया है।झूठ को गन्दगी और नापाकी फरमाया है ।

       रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहे व सल्लम ने फरमाया:-

मुसलमान सब कुछ हो सकता है मगर झूठा नहीं हो सकता

        हमारे हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व लल्लम ने फरमाया। सच मनुष्य को नेकी की तरफ लेजाता है । नेकी जन्नत का रास्ता  देखाती है। झूठ मनुष्य को बुराई की  तरफ लेजाता है । और बुराई दोज़ख मे पहूंचाती है।

अल्लाह का हुक्म है:-

        ऐ ईमान वालो ।
हर समय अल्लाह से डरते रहो और ठीक बात कहो।

अल्लाह पाक तमाम इनसानों को झूठी बातों से बचने और सच बोलने की तौफीक  अता फरमाए
                (आमीन)

दुआओं का मुहताज
मोहम्मद लुक़मान
JAMIA ISLAMIA QURANIA SEMRA WEST CHAMPARAN

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