माँ बाप अनमोल नेअमत हैंं
﷽
अस्सलामु अलैकुम वरह़मतुल्लाहि व बरकखतुह
मुह़तरम ह़ज़रात
जवानी मे मनुष्य पिता को शक की निगाह से देखता रहता है, जैसे पिता को हमारे सारे उन मुद्दों, आव्श्यकताओं तकलीफों या ज़रूरतों का एहसास ही नहीं।ये नए युग्य की आवश्यकताओं को नहीं समझता।
कभी कभी हम अपने पिता का तुलना भी शुरू कर देते हैं, इतनी मेहनत हमारे पिता ने की होती, बचत की होती , कुछ, बनाया होता, तो आज हम भी.... फ़लाँ की तरह आलीशान बंगला होता ,क़ीमती से क़ीमती गाड़ी मे घूम रहे होते!
कहाँ हो ? कब आओगे? अधिकांश फुज़ूल और फ़ालतू लगते हैं। सूइटर पहना है कुछ और भी पहन लो ठंड बहुत है मनुष्य सोचता है ओल्ड फैशन की वजह से पिता को बाहर की दुनिया का अनुभव नहीं। अक्सर औलादें अपने पिता को एक ही मेयार से परखती हैं ,घर, गाड़ी, पलौट , बैंक बैलेंस, कारोबार अपनी नाकामी इत्यादि बाप के खाते में डाल कर अपने आप को बहुत ज्यादा समझदार बनते हैं। हमारे भी कुछ होता तो हम भी अच्छे स्कूल मे पढते कारोबार करते।
इसमे शक नहीं, औलाद केलिए आइडियल उनका पिता ही होता है लेकिन कुछ बातें, जवानी मे समझ नहीं आतीं या हम समझने की कोशिश नहीं करते, इसलिए हमारे सामने, वक़्त की ज़रूरत होती है, दुनिया के मुकाबले का धुन सवार होता है, जल्द से जल्द कुछ पाने की खोज में हम कुछ खो भी देते हैं, जिसका एहसास बहुत देर से होता है।
वक़्त गुज़र जाता है, अच्छा भी बुरा भी और इतनी तेज़ी से गुज़रता है के मनुष्य पलक झपकते गुज़रे हुए कहानियों को अपने इर्द गिर्द मडलाते हुए देखना शुरू कर देता है।
जवानी, पढाई, नौकरी, शादी, औलाद और फ़िर वही किरदार, जो निभाते हुए ,हर समय, अपने पीता का चेहरा आखों के सामने आ आ कर,पिता की सोच , फ़िकर, परीशानी और तकलीफ को हमपर खोल के रख देता है।
औलाद को पिता बहुत देर से याद आता है, इतनी देर के हम उसे छूने ,महसूस करने, उसकी हर परेशानी को दूर करने से महरून हो जाते हैं यह एक अजीब एहसास है, जो समय गुज़रने के बाद अपनी असली रूप में हमें बेचैन ज़रूर करता है।
औलाद होते हूए हम समझते हैं पिता का छूना, प्यार करना, दिल से लगाना ,यह तो बचपन की बातें हैं । पिता बनकर आखें भीग जाती हैं, पता नहीं पिता ने कितनी बार दिल ही दिल में, हमें सीने से लगाने को बाज़ू फ़ैलाए होंगे?
अल्लाह पाक हम सबको अपने माता पिता की क़दर करने की तौफ़ीक अत़ा फरमाए माँ बाप बहुत बडी नेअमत हैं।
मोहम्मद लुक़मान
शिक्षक
जामिया इसलामिया क़ुरआनीया सेमरा पच्छमी चम्पारण
अस्सलामु अलैकुम वरह़मतुल्लाहि व बरकखतुह
मुह़तरम ह़ज़रात
जवानी मे मनुष्य पिता को शक की निगाह से देखता रहता है, जैसे पिता को हमारे सारे उन मुद्दों, आव्श्यकताओं तकलीफों या ज़रूरतों का एहसास ही नहीं।ये नए युग्य की आवश्यकताओं को नहीं समझता।
कभी कभी हम अपने पिता का तुलना भी शुरू कर देते हैं, इतनी मेहनत हमारे पिता ने की होती, बचत की होती , कुछ, बनाया होता, तो आज हम भी.... फ़लाँ की तरह आलीशान बंगला होता ,क़ीमती से क़ीमती गाड़ी मे घूम रहे होते!
कहाँ हो ? कब आओगे? अधिकांश फुज़ूल और फ़ालतू लगते हैं। सूइटर पहना है कुछ और भी पहन लो ठंड बहुत है मनुष्य सोचता है ओल्ड फैशन की वजह से पिता को बाहर की दुनिया का अनुभव नहीं। अक्सर औलादें अपने पिता को एक ही मेयार से परखती हैं ,घर, गाड़ी, पलौट , बैंक बैलेंस, कारोबार अपनी नाकामी इत्यादि बाप के खाते में डाल कर अपने आप को बहुत ज्यादा समझदार बनते हैं। हमारे भी कुछ होता तो हम भी अच्छे स्कूल मे पढते कारोबार करते।
इसमे शक नहीं, औलाद केलिए आइडियल उनका पिता ही होता है लेकिन कुछ बातें, जवानी मे समझ नहीं आतीं या हम समझने की कोशिश नहीं करते, इसलिए हमारे सामने, वक़्त की ज़रूरत होती है, दुनिया के मुकाबले का धुन सवार होता है, जल्द से जल्द कुछ पाने की खोज में हम कुछ खो भी देते हैं, जिसका एहसास बहुत देर से होता है।
वक़्त गुज़र जाता है, अच्छा भी बुरा भी और इतनी तेज़ी से गुज़रता है के मनुष्य पलक झपकते गुज़रे हुए कहानियों को अपने इर्द गिर्द मडलाते हुए देखना शुरू कर देता है।
जवानी, पढाई, नौकरी, शादी, औलाद और फ़िर वही किरदार, जो निभाते हुए ,हर समय, अपने पीता का चेहरा आखों के सामने आ आ कर,पिता की सोच , फ़िकर, परीशानी और तकलीफ को हमपर खोल के रख देता है।
औलाद को पिता बहुत देर से याद आता है, इतनी देर के हम उसे छूने ,महसूस करने, उसकी हर परेशानी को दूर करने से महरून हो जाते हैं यह एक अजीब एहसास है, जो समय गुज़रने के बाद अपनी असली रूप में हमें बेचैन ज़रूर करता है।
औलाद होते हूए हम समझते हैं पिता का छूना, प्यार करना, दिल से लगाना ,यह तो बचपन की बातें हैं । पिता बनकर आखें भीग जाती हैं, पता नहीं पिता ने कितनी बार दिल ही दिल में, हमें सीने से लगाने को बाज़ू फ़ैलाए होंगे?
अल्लाह पाक हम सबको अपने माता पिता की क़दर करने की तौफ़ीक अत़ा फरमाए माँ बाप बहुत बडी नेअमत हैं।
मोहम्मद लुक़मान
शिक्षक
जामिया इसलामिया क़ुरआनीया सेमरा पच्छमी चम्पारण

आमीन
ReplyDeleteमाशा अल्लाह बहुत खूब
ماشااللہ
DeleteSuma aameen
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