फैसला करने वालों की बुनियादी जिम्मेदारी

                           ﷽
           

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह

फैसला_करने- वालों_की_बुनियादी_जिम्मेदारी
         
    किसी भी समाज में एख्तिलाफ और नजा स्वभाविक बात है, ऐसे मामलों के समाधान के लिए लोग परिवार और समाज के अनुभवी बड़े बुजुर्गों की तरफ निहारते हैं और उनके फैसले को मानते हैं। यह एख्तिलाफ जरा बड़ा हो, तो अधिकतर लोग परिवार और समाज के बड़े बुजुर्गों के बजाय सरकारी अदालतों में जाते हैं, मात्र इसलिए कि अदालतें अपने फैसले को लागू करने के लिए पुलिस की ताकत और हुकूमत की सलाहियत भी रखती है। इसी ताकत और सलाहियत के लिये इस्लामी कानून में कूवते नाफिजा का शब्द व्यवहृत है। यह कूवते नाफिजा या पुलिस की ताकत और हुकूमत की सलाहियत "फैसला" का अंश नहीं है, फैसला का मतलब है कानून के अनुसार हक और सच का इजहार। किसी भी मामले में सच को झूठ से अलग करना, दावा और दलील के अनुसार देखना, गवाहों की विवेचना करना, फैसला करने वाले की बुनियादी जिम्मेदारी है।
 
    (  एक और बात जो बहुत ही है)
 
         तमाम मुसलमानों की यह जिम्मेदारी है कि वह मसलक, बिरादरी या इलाके की बुनियाद पर मुसलमानों को आपस में तफरीक पैदा करने से रोकें और कलमाए वाहिदा की बुनियाद पर मुत्तहिद व मुनज्जम रहने की मुसलसल जद्दोजहद करते रहें। एक  और बात है जिसका अल्लुक है वह दीनी ता'लीम है। हमारे पांच प्रतिशत बच्चे ही मदरसों और दीनी मकातिब में पढ़ते हैं। बाकी बच्चे और बच्चियां स्कूल में ता'लीम हासिल करते हैं और उनके वालदैन खासकर इंग्लिश मीडियम स्कूल और इसाई मिशनरियों के स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए अगर विशेष रूप से सभी बच्चों को छः साल से ग्यारह साल की उम्र के बीच दीनी ता'लीम से आरास्ता नहीं किया गया तो वह शरीयते इस्लामी से वाकिफ ही नहीं होंगे और वह शिक्षित होने के बावजूद दीनी ता'लीम से बिल्कुल अनभिज्ञ रह जायेंगे, जैसा कि आप बहुत सारे मुस्लिम मर्द व औरतों को जो सिर्फ जदीद ता'लीमयाफता ही हैं देख रहे हैं कि वह मात्र कुछ प्रचलित इबादतों को ही इस्लाम समझते हैं और उनकी पूरी जिंदगी पर गैर इस्लामी तहजीब छाई हुई होती है
   
   अल्लाह तआला तमाम मुसलमानों को सही सझ अता करे आमीन

दुआओं का मुहताज

         मोहम्मद लुक़मान

           जामिया इसलामिया कुरआनीया सेमरा
      पच्छिमी चम्पारण

Comments

  1. ماشااللہ

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  2. آمین ثم آمین
    رب کریم ہمیں اپنی رضا والی زندگی نصیب فرمائے آمین

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