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मैं भी कितना अजीब हूँ

              ﷽ अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहे व बर कातुह  _सेहत मंद हूँ तो_  _अल्लाह`` को भूल जाता हूँ  _बिजी हूँ तो_  _नमाज़'' भूल जाता हूँ_  बुराई करूँ तो  _अंजाम भूल जाता हूँ_  _खाता हूँ तो_  _बिस्मिल्लाह भूल जाता हूँ_  _खा लूँ तो_  _अल्हम्दुलिल्लाह_ _कहना भूल जाता हूँ_  _किसी से मिलूं तो_  _सलाम''भूल जाता हूँ_  _सोते हुए_  _तौबा भूल जाता हूँ_  _गुस्से में तो_  _बर्दाश्त भूल जाता हूँ_  सफर पर जाऊँ_ _तो_  _दुआ भूल जाता हूँ_ _क्या शान है मेरे_ _अल्लाह'' की_  _फिर भी नवाज़ता है_ _वह नहीं भूलता_ बेलेन्स हो या ना हो ये      सभी को करना_ में इस काबिल तो नही_   _जन्नत मागु_  _=== ऐ अल्लाह  ===_  _बस इतनी सी अर्ज़ है_  _के_       मेरी माँ मेरी जन्नत है  _उसे सदा_  _सलामत रखना_  _आमीन_ एक जवान  लड़के ने अपने दादा से पूछा  दादा...